दिन की दीपावली Tenali Raman Ki Hindi Story

Din Ki Deepawali Tenali Rama Ki Hindi Story
Din Ki Deepawali – Tenali Rama Ki Hindi Story

दिन की दीपावली
Tenali Raman Ki Hindi Story

एक बार की बात है दीपावली आने वाली थी। विजयनगर के महाराज कृष्णदेव राय चाहते थे कि इस बार की दीपावली कुछ विशेष हो। इसके लिए चर्चा जोरों पर थी कि क्या किया जाए जो दीपोत्सव को यादगार बन जाए।

राजपुरोहित ने कहा, “महाराजा! इस दीपावली पर विशाल धार्मिक कथा का आयोजन किया जाए।”

एक मंत्री ने कहा – महाराज! इस दिन खेल उत्सव आयोजित करें। तो किसी ने कहा – जादूगरों का करतब रखा जाए।

महाराज ने तेनालीराम से पूछा तो उसने कहा, “अन्नदाता! रात में दीयों की रोशनी से मन प्रसन्न हो जाता है। यदि दिन का उजाला भी दीपों से हो जाए तो इस बार की दीपावली यादगार हो जाए।”

महाराज ने बड़े आश्चर्य से कहा – हम कुछ समझे नहीं।

तो तेनाली ने कहा, “महाराज! घर के चिराग होते हैं बच्चे। इसलिए इन बच्चों के लिए ऐसा मेला लगाया जाए जिसका हर प्रबंध बच्चों के हाथों में हो। वो अपनी मर्जी से जो चाहे करें। बड़े उसमें हस्तक्षेप न करें। बच्चों का राज हो। बड़े भी मेले में जाएं, मगर बच्चे बनकर।”

राजा कृष्णदेव भी उत्साह से बोले – इससे तो बड़ा आनंद आएगा।

राज्य के खेल मंत्री ने कहा, “जी महाराज! और सभी बच्चों को आपकी ओर से पुरस्कार भी मिलें। तो ठीक है इस बार घर के दीपक यानि बच्चे ही दीपावली की तैयारी करेगें।”

राजा ने सहमति दी। राज्य के बच्चों की तैयारी से मेला भरपूर मनोरंजक व रंगीन साबित हुआ।

महाराज ने तेनालीराम को देखकर कहा – तुम्हारे सुझाव से ही हमें अपने दिन के उजाले की ताकत पता चली। तेनाली ने मुस्कराकर राजा को धन्यवाद किया।

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