तेनालीराम और पागल व्यक्ति Tenali Raman Stories in Hindi

Tenali Raman Aur Pagal Vyakti Tenali Raman Hindi Story for Kids
Tenali Raman Aur Pagal Vyakti – Tenali Raman Hindi Story for Kids

तेनालीराम और पागल व्यक्ति
Tenali Raman Stories in Hindi

एक बार की बात है तेनालीराम ने कहीं सुना था कि कोई दुष्ट आदमी साधु का भेस बदलकर लोगों को अपने जाल में फंसा लेता है। उन्हें प्रसाद के रूप में धतूरा खिला देता है। यह कार्य वह उनके शत्रुओं के कहने पर धन के लोभ में करता है।

धतूरा खाकर या तो कोई मर जाता और या कोई पागल हो जाता है। उन दिनों भी प्रसाद में धतूरा खाने से एक व्यक्ति पागल होकर नगर की सड़कों पर घूम रहा था। लेकिन धतूरा खिलाने वाले व्यक्ति के खिलाफ उसके पास कोई प्रमाण नहीं था। इसलिए वह खुले आम अपना सीना तानकर चलता था। तेनालीराम ने सोचा कि ऐसे व्यक्ति को तो अवश्य ही दंड मिलना चाहिए।

एक दिन जब वह दुष्ट व्यक्ति शहर की सड़कों पर आवारागर्दी कर रहा था तो तेनालीराम उसके पास गया और उसे बातों में उलझाए रखकर उस पागल के पास ले गया, जिसे धतूरा खिलाया गया था। वहां जाकर चुपके से तेनालीराम ने उसका हाथ पागल के सिर पर दे मारा।

उस पागल ने आव देखा न ताव, उस आदमी के बाल पकड़कर उसका सिर पत्थर पर टकराना शुरू कर दिया। पागल तो वह था ही, उसने उसे इतना मारा कि वह पाखंडी साधु वहीं मर गया।

यह मामला महाराज कृष्णदेव राय तक पहुंचा। महाराज ने पागल को तो छोड़ दिया, लेकिन क्रोधवश तेनालीराम को हाथी के पैर से कुचलवाने की सजा दे दी।

दो सिपाही तेनालीराम को संध्याकाल में एकांत स्थान पर ले गए और उसे गर्दन तक जमीन में गाड़ दिया। इसके बाद वे हाथी लेने चले गए। सिपाहियों ने सोचा कि अब यह बच भी कैसे सकता है।

कुछ देर बाद वहां से एक दुष्ट कुबड़ा ठग निकला। तेनालीराम ने उस कुबड़े ठग के बारे मे सुन रखा था कि वह बहुत बड़ा ठग है और दूसरे लोगों को पागल बना कर पैसे ठगता है।

उसने तेनालीराम से पूछा, “क्यों भाई, यह क्या तमाशा है? तुम इस तरह जमीन में क्यों गड़े हो?”

तेनालीराम ने कहा, “कभी मैं भी तुम्हारी तरह ही कुबड़ा था। पूरे दस साल तक मैं इस कष्ट से दुखी रहा। जो भी मुझे देखता, वही मुझ पर हंसता। यहां तक की मेरी पत्नी भी मुझ पर हंसती।

अचानक एक दिन मुझे एक महात्मा मिल गए। वे मुझसे बोले कि इस पवित्र स्थान पर पूरा एक दिन एक आँख बंद करके और बिना एक शब्द भी बोले गर्दन तक खड़े रहोगे, तो तुम्हारा यह कष्ट दूर हो जाएगा। मिट्टी खोदकर मुझे बाहर निकालकर जरा देखो कि मेरा कूबड़ दूर हो गया कि नहीं।”

उस ठग ने मिट्टी खोदकर तेनालीराम को बाहर निकाला, तो वह बहुत हैरान हुआ। कूबड़ का कहीं नामो-निशान तक नहीं था।

उसने तेनालीराम से कहा, “वर्षों बीत गए इस कूबड़ के बोझ को पीठ पर लदे हुए। मुझे क्या पता था कि इसका इलाज इतना सरल है। मुझ पर इतनी कृपा करो कि मुझे यहीं गाड़ दो। मैं तुम्हारा यह एहसान जीवन भर नहीं भूलूंगा और मेरी पत्नी को यह बात मत बताना कि कल तक मेरा कूबड़ ठीक हो जाएगा। मैं उसे हैरान करना चाहता हूँ।

तेनालीराम ने ठग से कहा, ”बहुत अच्छा।”

तेनाली ने उसे गर्दन तक गाड़ दिया। फिर उसके कपड़े बगल में दबाकर बोला, “अच्छा, तो मैं चलता हूँ। अपनी आंखें और मुंह दोनों बंद रखना चाहे कुछ भी क्यों न हो जाए, नहीं तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी और यह कूबड़ बढ़कर दुगुना हो जाएगा।”

ठग बोला, “चिंता मत करो। मैंने कूबड़ के कारण बड़े कष्ट भोगे हैं। इसे दूर करने के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ।”

तेनालीराम वहां से चलता बना।

कुछ देर पश्चात् राजा के सिपाही एक हाथी लेकर वहां पहुंचे और ठग का सिर उसके पैरों तले कुचलवा दिया। चूंकि शाम का समय था इसलिए सिपाहियों को पता ही नहीं चला कि यह कोई और व्यक्ति है।

सिपाही तेनालीराम की मृत्यु का समाचार लेकर महाराज के पास पहुंचा। तब तक उनका क्रोध शांत हो गया था। अब वे दुखी हो रहे थे क्योंकि उन्होंने तेनालीराम को मृत्युदंड दिया था। तब तक उस पाखंडी साधु व ठग के बारे में उन्हें काफी कुछ पता चल चुका था।

वह सोच रहे थे कि बेचारे तेनालीराम को बेकार ही अपनी जान गवानी पड़ी। उसने तो एक ऐसे अपराधी को दंड दिया जिसे मेरे पुलिस अफसर भी नहीं पकड़ सके।

अभी राजा सोच में ही डूबे थे कि तेनालीराम दरबार में आ पहुंचा और बोला – महाराज की जय हो।

राजा सहित सभी दरबारी आश्चर्य से उसके चेहरे की ओर देख रहे थे। तेनालीराम ने राजा को सारी कहानी सुनाई और राजा ने उसे क्षमा कर दिया।

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