धोखेबाज शेर और चालाक लोमड़ी Lion and Clever Fox Hindi Story

Lion and Clever Fox Hindi Moral Story for Kids
Lion and Clever Fox – Hindi Moral Story for Kids

धोखेबाज शेर और चालाक लोमड़ी
Lion and Clever Fox Hindi Story with Moral

एक बार एक शेर बड़े और मजबूत पिंजरे में फंस गया। उसने आजाद होने के लिए बहुत प्रयास किए। लेकिन उसकी सारे प्रयास व्यर्थ हो गए। तभी उधर से एक राहगीर गुजरा।

शेर को पिंजरे में बंद देखकर वह सकपकाकर चुपचाप भागने ही वाला था कि शेर ने उससे प्रार्थना की, “हे भले मनुष्य! कृपया मुझे इस पिंजरे से बाहर निकाल दो। मैं आपका उपकार जिंदगी भर नहीं भूलूंगा।”

राहगीर डरते हुए बोला, “अगर मैंने तुझे इस पिंजरे से बाहर निकाल दिया तो तुम मुझे खा जाओगे।”

शेर ने राहगीर से कहा, “मेरा विश्वास करो। मैं ऐसा घिनौना काम नहीं करूंगा कि जान बचाने वाले को ही खा जाऊं।”

राहगीर ने शेर की बात पर विश्वास कर लिया और पिंजरे का दरवाजा खोल दिया।

फिर क्या था? शेर ने एक भरपूर अंगड़ाई ली और शैतानियत से मुस्कराकर बोला, “मूर्ख मानव! मुझे बहुत भूख लगी है, अब तुम्हें खा जाने के सिवाय मेरे पास और कोई रास्ता नहीं है।”

राहगीर समझ गया कि वह धोखेबाज निकला। तब उसने बड़े धैर्य के साथ शेर से कहा, “ठीक है। तुम चाहो तो मुझे खा लो, पर यह कतई न्यायसंगत नहीं है। और हां, अगर यहां कोई अन्य जानवर है तो उसी से पूछ लेते हैं। वह जैसा कहेगा, मैं तैयार हूं।”

शेर ने सोचा कि इसमें हर्ज़ ही क्या है। वह बोला, “ठीक है, लेकिन पूछें तो पूंछे किससे?”

संयोगवश उधर एक लोमड़ी आ निकली। लोमड़ी की बुद्धिमानी तो सभी जानते हैं। उन दोनों को देख वह छिप ही रही थी कि राहगीर और शेर ने उसे बुला लिया और अपनी-अपनी बात उसे बता दी।

लोमड़ी शेर की मूर्खता और राहगीर की विवशता समझ गई। उसने मन ही मन निश्चय किया कि आज शेर को सबक जरूर सिखाऊंगी।

शेर भी शायद इस गुमान मे था कि लोमड़ी उसके भय से फैसला मेरे पक्ष मे करेगी।

लोमड़ी ने घटना स्थल का निरीक्षण किया और फिर बड़ी गंभीर होकर बोली, “मैं एक बार देखना चाहती हूं कि किस तरह यह सब हुआ। उसे एक बार दोनों मेरे सामने दोहरा लें, जिससे आपकी बात स्पष्ट हो सके।”

शेर ने लोमड़ी से कहा, “मैं कुछ समझा नहीं।”

लोमड़ी बोली, “मेरा मतलब है कि आप एक बार फिर से पिंजरे में तो जाइए।”

फिर राहगीर की ओर मुखातिब होकर उसने कहा, “आप भी जरा वहां (पिंजरे के बाहर) खड़े हो जाएं।”

शेर पिंजरे में घुसा तो लोमड़ी ने राहगीर से पूछा, “जब तुम यहां आए थे तो पिंजरे का दरवाजा खुला था या बंद?”

राहगीर ने कहा, “जी, दरवाजा तो बंद था।”

राहगीर का इतना कहा ही था कि लोमड़ी ने फुर्ती से उछलकर पिंजरे का दरवाजा बंद कर दिया। तब लोमड़ी मुस्कुराते हुए शेर से बोली, “अब आप यहीं बैठकर आराम फरमाइए।”

फिर लोमड़ी ने राहगीर से विदा ली। राहगीर ने लोमड़ी को हृदय से धन्यवाद दिया और उसकी बुद्धिमानी की प्रशंसा की।

शिक्षा – इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि किसी पर जल्दी विश्वास नहीं करना चाहिए और मुसीबत में हमेशा धेर्य से काम लेना चाहिए।

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