गुलाब का चोर Tenali Rama Ki Hindi Kahani

Gulab Ka Chor Tenali Raman Ki Hindi Kahani
Gulab Ka Chor – Tenali Raman Ki Hindi Kahani

गुलाब का चोर
Tenali Rama Ki Hindi Kahani

तेनालीराम की पत्नी को गुलाब के बड़े-बड़े फूलों को जूड़े में लगाने का बेहद शौक था। उसकी पसंद के फूल केवल राज उद्द्यान में ही थे। अत: वह अपने पुत्र को रोजाना वहां भेजकर चोरी से एक फूल तुड़वा लेती थी।

तेनालीराम से जलने वालों को जब यह पता चला तो उन्होंने तेनालीराम को महाराज कृष्णदेव राय की नजरों मे गिराने का निर्णय लिया। उन्होंने उसके फूल चोरी करने का समय नोट कर लिया।

एक दिन जब राजसभा चल रही थी, तब तेनालीराम की मौजूदगी में महाराज से शिकायत कर दी और कहा, “महाराज! चोर इस समय आपके बगीचे में है। यदि आपकी इजाजत हो तो उसे पकड़वा कर हाजिर करें।

महाराज ने कहा, “ठीक है। वह चोर जो कोई भी है, उसे हमारे सामने पेश करो।”

सभी दरबारी कुछ सैनिकों के साथ बगीचे के द्वार पर आ गए और सिपाहियों को बगीचे को चारों तरफ से घेर लेने का आदेश दिया। वे लोग तेनालीराम को भी अपने साथ ही ले आए थे और उन्हें पूरी बात बता भी चुके थे कि वह चोर और कोई नहीं, बल्कि आपका ही पुत्र है।

कुछ दरबारी इस बात पर बड़ा आनंद ले रहे थे कि जब तेनालीराम का बेटा चोर की हैसियत से दरबार में पेश होगा तो तेनालीराम की क्या बात बनेगी।

एक दरबारी ने चुटकी लेते हुए कहा. “क्यों तेनालीराम! अब क्या कहते हो?”

एकाएक ही तेनालीराम ज़ोर से चिल्लाए, “अरे भाई! कहना क्या है? मेरे बेटे के पास अपनी बात कहने के लिए जुबान है। वह स्वंय ही महाराज को बता देगा कि वह बगीचे में क्या करने आया है। वैसे मेरा ख्याल तो यह है कि वह अपनी माँ की दवा के लिए पौधों की जड़ें लेने आया होगा न कि गुलाब के फूल चोरी करने आया है।”

तेनालीराम के बेटे ने बगीचे के अंदर से ये शब्द सुन लिए। दरअसल उसे सुनाने के लिए ही तेनालीराम ने इतनी ज़ोर से बोला था। वह फौरन समझ गया कि उसका पिता क्या कहना चाहता है। अत: उसने झोली में एकत्रित किये हुए गुलाब के फूल फेंक दिए और कुछ पौधों की जड़ें उठाकर अपनी झोली मे रखकर बाहर आ गया।

जैसे ही वह बाहर आया, वैसे ही दरबारियों के इशारे पर सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया और ले जाकर दरबार में पेश किया

“महाराज! यह है आपके बगीचे का चोर। तेनालीराम का पुत्र। यह देखिए, अभी भी इसकी झोली में गुलाब के फूल हैं।”

तेनालीराम के बेटे ने अपनी झोली में से सारी जड़ें महाराज के सामने फर्श पर डाल दी और बोला, “गुलाब के फूल? कैसे गुलाब के फूल? मैं तो अपनी माँ की दवा के लिए पौधों की जड़ें लेने आया था।”

यह देखकर महाराज ने दरबारियों को खूब फटकार लगाई। सभी दरबारी शर्म से सिर झुकाए खड़े सोचते रहे कि गुलाब के फूल जडें कैसे बन गए?

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