डरपोक खरगोश Darpok Khargosh | Moral Story

डरपोक खरगोश
Darpok Khargosh

एक जंगल में एक खरगोश रहता था। वह बहुत ही डरपोक था। कहीं जरा-सी भी आवाज सुनाई पड़ती तो वह डरकर भागने लगता। डर के मारे वह हर वक्त अपने कान खड़े रखता। और इसलिए वह कभी सुख से सो नहीं पाता था।

एक दिन खरगोश एक आम के पेड़ के नीचे सो रहा था। तभी पेड़ से एक आम उसके पास आकर गिरा। आम गिरने की अवाज सुनकर वह हड़बड़ा कर उठा और उछलकर दूर जा खडा हुआ।

Moral Story - Darpok Khargosh
Moral Story – Darpok Khargosh

“भागो! भागो! आसमान गिर रहा है।” चिल्लाता हुआ सरपट भागने लगा।

रास्ते में उसे एक हिरण मिला। हिरण ने खरगोश से पूछा, “अरे भाई तुम इस तरह भाग क्यों रहे हो? आखिर मामला क्या है?”

खरगोश ने कहा, “अरे भागो, भागो! जल्दी भागो! आसमान गिर रहा है।”

हिरण भी डरपोक था इसलिए वह भी भयभीत होकर खरगोश के साथ भागने लगा। भागते-भागते दोनों जोर-जोर से चिल्ला भी रहे थे – भागो! भागो! आसमान गिर रहा है।

उन दोनों को देखकर डर के मारे जिराफ, भेडि़या, लोमडी, गीदड़ व अन्य जानवरों का झुंड भी उनके साथ भागने लगे। सभी भागते-भागते एक साथ चिल्लाते जा रहे थे – भागो! भागो! आसमान गिर रहा है।

उस समय सिंह अपनी गुफा में सो रहा था। जानवरो का शोर सुनकर वह हडबड़ाकर जाग उठा। गुफा से बाहर आया तो उसे बहुत क्रोध आया। उसने दहाड़ते हुए कहा, “रूको! रूको! आखिर क्या बात है?”

सिंह के डर से सभी जानवर रूक गए। सब ने एक ही स्वर मे कहा, “भागो! भागो! जल्दी भागो! आसमान नीचे गिर रहा है।”

यह सुनकर सिंह को बड़ी हंसी आई। हंसते-हंसते उसकी आंखों में आंसू आ गए। उसने अपनी हंसी रोककर कहा, “आसमान को गिरते हुए किसने देखा है?”

सभी जानवर एक दूसरे का मुंह ताकने लगे। अंत में सभी की नजर खरगोश की ओर मुड़ गई। तभी उस खरगोश के मुंह से निकला, “आसमान का एक टुकड़ा तो उस आम के पेड़ के नीचे ही गिरा है।”

“अच्छा चलो, हम वहां चलकर देखते हैं।” सिंह ने कहा।

सिंह के साथ जानवरों की पूरी पलटन आम के पेड़ के पास पहुंची। सब ने इधर-उधर तलाश की। किसी को आसमान का कोई टुकड़ा कहीं भी नजर नही आया। हां, एक आम जरूर उन्हें जमीन पर गिरा हुआ दिखाई दिया।

सिंह ने आम की ओर इशारा करते हुए खरगोश से पूछा, “यही है आसमान का टुकड़ा, जिसके लिए तुमने सबको भयभीत कर दिया।”

अब खरगोश को अपनी भूल समझ में आई। उसका सिर शर्म से झुक गया। वह डर के मारे थर-थर कांपने लगा।

दूसरे जानवर भी इस घटना से बहुत शर्मिंदा हुए। वे अपनी गलती पर पछता रहे थे कि सुनी-सुनाई बात से डरकर वे बेकार ही भाग रहे थे।

शिक्षा – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी सुनी-सुनाई बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए। कोई प्रतिक्रिया देने से पहले खुद उस बात को जांचना चाहिए।

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